बेरुखी!!

ज़िन्दगी कुछ पेचीदा सी होती जा रही है,
गैरों से नज़दीकियां, और
अपनों से दूरीयां बढ़ती जा रही हैं|_DSC0313 copy

कल तक जो रिश्ते आँखों में सितारे बन के चमकते थे,
आज उनकी बेरुखी, बादल बन के आँखों में छाई है|

आसमान में बादल, और आँखों में बदल,
इस बात पर अड़े हैं कि पहले कौन बरसेगा|
दिल दुआ करता है कि दोनों साथ में बरसें ,
रोने का किसी को पता नहीं चलेगा|

ज़िन्दगी ग़मगीन नहीं उन रिश्तों के बिना,
मगर एक खलिश सी है|
आखरी अलविदा जब कहेंगे हम सबसे,
कितने अधूरे रिश्तों का बोझ साथ में ले जाएंगे|

ज़िन्दगी कुछ पेचीदा सी होती जा रही है,
गैरों से नज़दीकियां, और
अपनों से दूरीयां बढ़ती जा रही हैं|

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3 Comments (+add yours?)

  1. Aayush
    Jul 10, 2014 @ 22:34:24

    Nice 🙂

    Reply

  2. Sandeep Gupta
    Jul 11, 2014 @ 00:08:04

    GP … by god ki kasam …. kya likha hai ….. dil bara aya

    Reply

  3. Raghavendra
    Jul 11, 2014 @ 00:08:58

    दिल को छू गई ….

    Reply

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